लॉक डाउन 3.0 की शुरुआत जाम के साथ:- आज 4 मई से शुरू हो रहे लॉक डाउन के तीसरे चरण में कुछ सेवाओं में सरकार की तरफ से ढील दी गई ,जिसमें एक शराब की दुकानों के खुलने का भी निर्णय था, पिछले 40 दिनों से लोग कोरोना के चलते अपने घरों में कैद थे और आज जब तीसरे चरण की शुरुआत में शराब की दुकानों के खुलने का निर्णय आया तो पूरे देश में जहां भी शराबी की दुकानें खुली वहां पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, कुछेक जगहों को छोड़ दिया जाए तो लगभग हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती दिखाई दी, कई जगह हालात तो यह हो गए पुलिस को लाठीचार्ज कर लोगों को खदेड़ना पड़ा, अब सभी के मन में यह डर सता रहा है कहीं पिछले 40 दिनों की मेहनत पर यह एक निर्णय भारी न पड़ जाए, क्या अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए शराब की दुकान खोलना इतना जरूरी था ? क्या राजस्व बढ़ाने के लिए सिर्फ यही एक रास्ता बचा था जिसके जरिए हो रहे नुकसान की भरपाई की जा सकती है? सरकार के इस निर्णय को लेकर बहुत से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है , जब कोरोना महामारी एक दूसरे के द्वारा फैलता है तब शराब की दुकानों के बाहर लंबी लाइनों के द्वारा क्या यह एक दूसरे में नहीं फैलेगा? दिल्ली के कृष्णा नगर, करोल बाग ,चंद्र नगर, कोडली आदि बहुत से इलाकों में शराब की दुकानों के बाहर सुबह से ही लंबी लंबी लाइनें लग गई ,कहीं-कहीं तो दो-दो तीन-तीन किलोमीटर लंबी लाइन देखी गई, सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां कई जगहों पर जमकर उड़ाई गई , यहां तक कि पुलिस को लाठी चार्ज करके लोगों को खदेड़ना पड़ा और बहुत से जगहों पर पुलिस ने शराब की दुकानों को बंद करवा दिया ,पूर्वी दिल्ली की सभी दुकानों को पुलिस ने बंद करवा दिया ,यही हाल मुंबई के दादर, कुर्ला आदि जगहों पर था ,उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी शराब की दुकानों के बाहर लंबी लंबी लाइन लग गई ,यहां भी पुलिस को बल प्रयोग करके लोगों को हटाना पड़ा ,यही हाल असम के गुवाहाटी, कर्नाटक में हुबली ,गदगा, बेंगलुरु आदि जगहों पर देखी गई, यह और बात है कि सरकार को सबसे अधिक राजस्व की प्राप्ति शराब से ही आती है लेकिन अब यह भी देखना होगा इसके कारण कहीं 40 दिनों से चला आ रहा सख्त लॉक डाउन का पालन कर रहे लोगों के मेहनत पर पानी ना फिर जाए ?

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